Thursday, April 21, 2011

ये कैसी मेरी कहानी है


ये कैसी मेरी कहानी है

कैसी ये मेरी जिंदगानी है,
कैसी ये मेरी कहानी है,
दिल नाराज है और मेरी आँखों में भी पानी है,
हर रोज़ एक नयी राह पे जाना है,
पर मंजिल हर रोज़ की तरह बेगानी है,
खुदा क्यूँ नही सुनता मेरी,
शायद उसका लिए भी मेरी जिंदगी बेमानी है,
ऐसी ही मेरी कहानी है, 
खुद से लडती बेबस ये जिंदगानी है, 

खुद से क्यों नाराज़ हू मै,
इस सवाल का जवाब रोज़ धुन्दती मेरी जिंदगानी है,
फिर भी लोग कहते है की सुनहरी मंजिल  इसे पानी है,
पर इस बात ये अनजान है की मेरी किस्मत बस यही एके रुक जानी है,
कब होगी इस जिंदगी की नयी सुबह
अब इन्तेजार करती हूँ इस बात का 
की आगे भी कोई मोड़ है मेरी जिंदगी का या बस यही पर 
इसी मोड़ पर खतम मेरी कहानी है 
न कोई रास्ता न कोई मंजिल,
ऐसी ही मेरी कहानी है....

1 comment:

  1. very confusing. jyada padhunga to me ulajh jaunga.
    aajkal badi muskil se thoda sa suljha hua hoon.

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