Monday, May 30, 2011

वो .


वो ..
दर्द उनका भी आँखों से बयां होता होगा,
दीवारों में परछाइय़ा सर टकराती होंगी,
चोट तो उन्हें भी बहुत आती होगी,
सपने उनके भी टूट जातें होंगे,
मन में उमंगों की भीड़ सी जमा होगी,
चेहरा कुछ बयां करने की कोशिश करता होगा,
पर समझने वालों की कमी है कुछ इस जहाँ में,
इसीलिए शायद कोई समझ न पता होगा,
जब अपना दर्द किसी को समझा न पाते होंगे,
तब आसुओं में शायद खुद ही डूब जाते होंगे,
तब मेरी ही तरह खुद पे कई सवाल उठाते होंगे,
सवालों के जवाब न मिलने पर,
 उन अँधेरी परछाइयों फिर से ग़ुम हो जाते होंगे,
दुनियां के सामने झूटी मुस्कराहट लिए भीड़ में ग़ुम जाते होंगे,
वो....

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