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Monday, June 13, 2011

सोचती हूँ मै...!!!!


सोचती हूँ मै 

इस जिंदगी में कही कुछ कमी सी है,
सोचती तो हू मै बहुत,
पर जाने क्यों इन आँखों में नमी सी है,.
अपने ही आप में कुछ अकेली सी हू मै,
सब कुछ सिमट कर मुझमे समा गया है,
इस अनजानी सी भीड़ में हर चेहरा नया है,
जब इन चेहरों में अपना न कोई ढूंढ़ पाती हूँ,
तो फिर से एक दर्द उभरता है,
फिर एक तन्हाई छाती है,
न जाने ये काली रात बार बार क्यों आती है,
क्यों इस अनजानी भीड़ में कोई अपना नही है,
क्यों ये सारे चेहरे इतने पराये से है,
दोस्तों के नाम पे बस कुछ साए से है,
उन्हें भी अपना बनाऊं या नही,
आज कल इसी सोच में पड़ी हू मै,
सोचती तो हू मै बहुत,
की इस जिंदगी में वो क्या कमी सी है,
बस सोचती हूँ मै.......

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