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Wednesday, June 29, 2011

जिंदगी

जिंदगी

बिखरे हुए पन्नो के फिर से सिमट जाने का,

आँखों को नए सपने दिखने का,

फिर उन सपनो में ही कही ग़ुम जाने का,

पलकों से उन दो आसुओं के छलक जाने का,

और इतने में ही पलकों के भीग जाने का,

दिल से पलकों के बीच एक रिश्ता बन जाने का,

एक.अधूरा,कुछ पूरा सा नाम है जिंदगी.....

सब कुछ परछाइयों में कही ग़ुम सा जाता है,

खड़े होते है कुछ मुस्किल से मुकाम सामने,

आशाओं की चादर पे धूल से जम जाती है,

हर सपना नाकाम सा नजर आता है,

और हम किसी मोड़ पर अकेले खड़े रह जाते है,

इसी दर्द से तो अनजान है जिंदगी,

और फिर अंधेरो में नए उजाले ढूंढ लाने का

एक अधूरा कुछ पूरा सा नाम है,जिंदगी....!!!!!


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