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Saturday, July 30, 2011

आज मेरे दिल में....

आज मेरे दिल में....

आज मेरे दिल में एक ख्याल है आया,
जाने दिमाग फिर एक सवाल है ले आया,
क्यों मिल के बिछड़ना जरुरी है यहाँ पे,
क्यों खुद से ही लड़ना जरुरी है यहाँ पे,
क्यूँ अपनी ही आवाज़ मेरे कानो तक नही पहुँच  पाती,
क्यों अकेले से रह गये है हम यहाँ पे,
क्यों ऐसी सजा सा ये जीवन मिला है,
क्यों दिलो दिमाग पे ये अँधेरा घना है,
क्यों सपनो पे चाय है गहरी रात का ये साया,
आज इन ख्वाबों की क्यों बोली लगी है,
आज समय की ना जाने क्यों घडी बंद पड़ी है,
क्यों ऊपर को जाने की एक होड़ सी लगी है,,,क्यूँ??
आज मेरे दिल में एक ख्याल है आया....!!!




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