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Wednesday, November 2, 2011

एक तू ही तू ही बस तू ही तू...!!

एक तू ही तू,बस तू ही तू,
हर दिशा हर जीव में तू,
हर मृत्त और सजीव में तू,
हर खुशी,हर पीर में तू,
हर दिल में तू,हर मन में है तू,
इस धरती के कण कण में है तू,
हर स्वांस में तू,हर आस में तू,
हर हर्ष और उल्लास में तू,
इस अग्नि और वायू में तू है,
एक तू ही तू,बस तू ही तू है,
सपनो में भी है,अपनों में है तू,
रातों में तू,दिन में भी तू है,
अंदर भी तू बाहर भी तू,
इस देह की चादर में तू,
इन आशाओं रंगों में है तू,
सुर की नयी तरंगों में है तू,
बस तू ही एक सत्य ज्ञान,
शेष सब है निर अर्थ समान,
तुझको ही बस सत्य मान
तुझको है सत सत प्रणाम,
एक तू ही तू ही बस तू ही तू...!!

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