Tuesday, February 25, 2014

मेरी आशिकी...!!

ये रूह मे छनती रही,

छुपती रही निकलती रही,

धूप मे पिघलती रही,

इन्ही आशाओ की डोर थामे,

मेरी आशिकी चलती रही,

सामने जब तक वो रहे,

एहसास भी नासमझ थे,

दूर हमसे जब हुए,

तब ये शाम भी ढलने लगी,

एक होने की बेपरवाह तमन्नाओ के तले,

तेरी दूरियां खलती रही,

तेरी जुदाई के दर्द मे भी,

मुश्किलों से टकराते हुए,

ये बेबाक़ सी बढ़ती रही,

इन्ही आशाओ की डोर थामे,

मेरी आशिकी चलती रही..!!

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