Thursday, December 3, 2015

तु मुझको दर्द भी देजा

तु मुझको दर्द भी देजा,
दवा भी तुम लगा देना,
हो गर गलतियां मुझसे,
सजा भी तुम सुना लेना,
तेरा जो हाथ छोड़ू मैं ,
पकड़ कर तुम बिठा लेना,
गर हूं  नाराज़ मैं तुमसे,
पलट कर तुम मना लेना,
रिश्ते की एहमियत फिर से,
मुझको फ़िर से तुम सिखा देना।।


द्धारा 
(सुचिता यादव)

1 comment:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 04 जून 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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