Thursday, September 28, 2017

ज़िन्दगी, मिल मुझे किसी मोड़ पर..!!

ज़िन्दगी तुझे मै ढूंढती हूँ,
तू मिल मुझे किसी मोड़ पर,
कहते है सब मेरे पास थी तू,
लगता चली गयी मुझको छोड़कर,
अफ़सोस में हूँ मै, हैरान भी,
क्यों चली गयी मुझको छोड़कर,
चाहा तो तुझको बहुत किया,
फिर जाने क्या हुई है खता,
रिश्ता है तुझसे गहरा मेरा,
एक बार आके मिल तो ले,
मेरी दोस्त बन मेरे साथ रह,
तेरे रंगों से अनभिज्ञ हूँ मै,
मुझे अपने रंगों में भिगो तो दे,
तुझे जी सकू संग मर सकू,
इतना करम तो कर ही दे,
रात है कारी बड़ी ये,
तू बन के सवेरा मुझमे उतर,
ज़िन्दगी तुझे मै ढूंढती हूँ,

तू मिल मुझे किसी मोड़ पर...!!

No comments:

Post a Comment